Control of Powdery Mildew of muskmelon

ख़रबूज़ा में भभूतिया रोग का नियंत्रण:- पत्तियों पर सफ़ेद या धूसर रंग के धब्बों का निर्माण होता है| जो बाद में बढ़कर सफ़ेद रंग का पाउडर में बदल जाते है|…….

  • पत्तियों पर सफ़ेद या धूसर रंग के धब्बों का निर्माण होता है| जो बाद में बढ़कर सफ़ेद रंग का पाउडर में बदल जाते है|
  • पंद्रह दिन के अंतराल से हेक्ज़ाकोनाजोल 5% SC 300 मिली. प्रति एकड़ या थायोफिनेट मिथाईल 400 ग्राम प्रति एकड़ का घोल बनाकर छिडकाव करें|

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Downy mildew control in muskmelon

ख़रबूज़ा में डाऊनी मिल्ड्यू (मृदुरोमिल आसिता) का नियंत्रण:- पत्तियों की निचली सतह पर पानी वाले धब्बे बन जाते हैं| जब पत्तियों के निचली सतह पर पानी वाले धब्बे होता हैंं, प्रायः उसी के अनुरूप….

  • पत्तियों की निचली सतह पर पानी वाले धब्बे बन जाते हैं|
  • जब पत्तियों के निचली सतह पर पानी वाले धब्बे होता हैंं, प्रायः उसी के अनुरूप ही ऊपरी सतह पर कोणीय धब्बे बनते हैंं।
  • धब्बे सबसे पहले पुरानी पत्तियों पर बनते हैंं जो धीरे-धीरे नई पत्तियों पर फैलते हैंं।
  • जब धब्बे फैलने लगते हैं तो यह पीली और फिर भूरे एवं सूखे हुए होते हैं|
  • ग्रसित लताओं पर फल नही लगते हैंं।
  • प्रभावित पत्तियों को तोड़कर नष्ट कर दें।
  • मैंकोजेब 75% WP @ 350-400 ग्राम / एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% WP @ 200-250 ग्राम / एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें|
  • फसल चक्र को अपना कर एवं खेत की सफाई कर रोग की आक्रामकता को कम कर सकते हैंं।

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Anthracnose control in watermelon

तरबूज में एन्थ्रेकनोज का नियंत्रण:- खेतों को साफ रखे एवं उचित फसल चक्र अपनाकर बीमारी के फैलने से रोकना चाहिये। बीजों को कार्बोंन्डाजिम 50% WP से 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।

  • खेतों को साफ रखे एवं उचित फसल चक्र अपनाकर बीमारी के फैलने से रोकना चाहिये।
  • बीजों को कार्बोंन्डाजिम 50% WP से 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।
  • 10 दिनों के अंतराल से मेंकोजेब 75% डब्ल्यूपी @ 400 ग्राम प्रति एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% डब्ल्यूपी @ 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

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Seed Treatment in green gram

मुंग का बीजोपचार:- बुवाई से पहले बीज को कार्बोक्सिन 37.5 +थायरम 37.5 @ 2.5 ग्राम / किलोग्राम बीज से उपचारित करना चाहिये।

बुवाई से पहले बीज को कार्बोक्सिन 37.5 + थायरम  37.5 @ 2.5 ग्राम / किलोग्राम बीज से उपचारित करना चाहिये।

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Downy mildew control in watermelon

तरबूज में डाऊनी मिल्ड्यू (मृदुरोमिल आसिता) नियंत्रण:- पत्तियों की निचली सतह पर पानी वाले धब्बे बन जाते हैं| जब पत्तियों के निचली सतह पर पानी वाले धब्बे होता हैंं, प्रायः उसी के अनुरूप ही……..

  • पत्तियों की निचली सतह पर पानी वाले धब्बे बन जाते हैं|
  • जब पत्तियों के निचली सतह पर पानी वाले धब्बे होता हैंं, प्रायः उसी के अनुरूप ही ऊपरी सतह पर कोणीय धब्बे बनते हैंं।
  • धब्बे सबसे पहले पुरानी पत्तियों पर बनते हैंं जो धीरे-धीरे नई पत्तियों पर फैलते हैंं।
  • जब धब्बे फैलने लगते हैं तो यह पीली और फिर भूरे एवं सूखे हुए होते हैं|
  • ग्रसित लताओं पर फल नही लगते हैंं।
  • प्रभावित पत्तियों को तोड़कर नष्ट कर दें।
  • मैंकोजेब 75% WP @ 350-400 ग्राम / एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% WP @ 200-250 ग्राम / एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें|
  • फसल चक्र को अपना कर एवं खेत की सफाई कर रोग की आक्रामकता को कम कर सकते हैंं।

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Control of gummy stem blight in bottle gourd

लौकी में गम्मी तना झुलसा रोग की रोकथाम:- इस बीमारी में पोधे की जड़ो को छोड़कर सभी भागो में संक्रमण हो जाता है| प्रारम्भिक लक्षण पोधे की पत्ती के किनारों पर पीलापन /हरिम्हीनता दिखाई पड़ती है,और सतह पर जल भरे हुवे धब्बे दिखाई देते है|

  • इस बीमारी में पोधे की जड़ो को छोड़कर सभी भागो में संक्रमण हो जाता है|
  • प्रारम्भिक लक्षण पोधे की पत्ती के किनारों पर पीलापन /हरिम्हीनता दिखाई पड़ती है,और सतह पर जल भरे हुवे धब्बे दिखाई देते है|
  • इस रोग से ग्रसित पोधे के तने पर घाव बन जाते हैं जिससे लाल-भूरे, काले रंग का चिपचिपा पदार्थ (गम) निकलता हैं|  तने पर भूरे-काले रंग के धब्बे बन जाते जो बाद में जाकर घाव से मिल जाते हैं |
  • लौकी के बीजो पर मध्यम-भूरे, काले धब्बे पड़ जाते है|

प्रबंधन:

  • स्वस्थ बीजो का चयन करें |
  • रोपाई का निरीक्षण करें एवं संक्रमित पोधौ को उखाड़ कर खेत से बाहर फैंक दें|
  • बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत ही क्लोरोथालोनिल 75% WP @ 350 ग्राम/ एकड़ या टेबुकोनाज़ोल 25.9% EC @ 200 मिली/ एकड़ का घोल बना कर छिड़काव करें|

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Alternaria leaf blight control in bottle gourd

लौकी में एल्टरनेरिया अंगमारी का नियंत्रण:-पत्तियों पर पीले रंग के धब्बे बन  जाते है जो भूरे रंग से परिवर्तित होकर काले रंग के हो जाते है। ये धब्बे किनारों से शुरू  होते है जो बाद में संकेन्द्रीय रूप धारण कर लेते है।

  • पत्तियों पर पीले रंग के धब्बे बन  जाते है जो भूरे रंग से परिवर्तित होकर काले रंग के हो जाते है।
  • ये धब्बे किनारों से शुरू  होते है जो बाद में संकेन्द्रीय रूप धारण कर लेते है।
  • अत्यधिक ग्रसित लताओं के अन्दर चारकोलनुमा पावडर जमा हो जाता है।
  • बीमारी की रोकथाम करने हेतु खेतों की सफाई करें एवं फसल चक्र अपनाएँ।
  • फफूंदनाशक 10 दिनों के अंतराल से मेंकोजेब 75 % डब्ल्यू पी @ 400 ग्राम प्रति एकड़ या हेक्साकोनाज़ोल 5% एससी @ 300 मिली / एकड़ का स्प्रे करे |
  • क्लोरोथालोनिल 75 डब्ल्यू पी @ 300  ग्राम प्रति एकड़ की दर से घोल बनाकर भी छिड़काव किया जा सकता है।

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Collar rot control in bottle gourd

लौकी में तना सड़न रोग का नियंत्रण:-तने के आधार पर गहरे भूरे हरे रंग के जल युक्त धब्बों का निर्माण हो जाता है। अंततः संपूर्ण पौधा सड़ कर मर जाता है।

  • तने के आधार पर गहरे भूरे हरे रंग के जल युक्त धब्बों का निर्माण हो जाता है। अंततः संपूर्ण पौधा सड़ कर मर जाता है ।
  • इस बीमारी के संक्रमण अवस्था पर सफेद रंग के धागेनुमा तंतुओं का विकास हो जाता है।
  • ग्रसित पौधे आसानी से तने के आधार वाले भाग से भूमि से उखड़ जाते है, किन्तु पौधे का जड़ वाला भाग भूमि के अंदर ही रह जाता है।
  • बीजों को बुवाई के पूर्व कार्बेन्डाजिम @ 2.5 ग्राम प्रति कि. ग्राम बीज की दर से उपचारित करे।
  • बीजों की बुवाई ऊपरी क्यारियों वाली सतह पर करनी चाहिये।
  • जड़ों के पास मेंकोजेब 63% + कार्बेन्डाजिम 12% WP @  400 ग्राम / एकड़ या थायोफनेट मिथाइल 70% डब्ल्यूपी @ 300 ग्राम / एकड़ फफूँदनाशक का ड्रेंचिंग करे।
  • खेत में पहले से लगी हुई फसल के अवशेष को भूमि गहराई में दबा देना चाहिये।

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Control of anthracnose in bottle gourd

लौकी में एन्थ्रेकनोज (धब्बा रोग) का नियंत्रण :-खेतों को साफ रखे एवं उचित फसल चक्र अपनाकर बीमारी के फैलने से रोकना चाहिये।
बीजों को कार्बेन्डाजिम 50% WP फफूदनाशक के द्वारा 2.5 ग्राम की दर से उपचारित करें।

  • खेतों को साफ रखे एवं उचित फसल चक्र अपनाकर बीमारी के फैलने से रोकना चाहिये।
  • बीजों को कार्बेन्डाजिम 50% WP फफूदनाशक के द्वारा 2.5 ग्राम की दर से उपचारित करें।
  • 10 दिनों के अंतराल से मेंकोजेब 75%डब्ल्यूपी @ 400 ग्राम प्रति एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% डब्ल्यूपी @ 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

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Control of downy mildew in Snake gourd

ककड़ी में कापड़िया रोग/ डाऊनी मिल्ड्यू का नियंत्रण:-अधिक नमी वाले मौसम के दौरान, फसल पत्तियों की निचली सतह पर है।
पत्तिया जल्द ही पूरी तरह से सूख जाती है। अच्छी जल निकासी और हवा की आवाजाही के साथ….

  • अधिक नमी वाले मौसम के दौरान, फसल पत्तियों की निचली सतह पर है।
  • पत्तिया जल्द ही पूरी तरह से सूख जाती है।
  • अच्छी जल निकासी और हवा की आवाजाही के साथ साथ अच्छी तरह धूप की उपलब्धता के लिए चौड़ी नालियों वाली क्यारियों बनानी चाहिए इससे रोग का फैलाव कम होता हैं|
  • मैंकोजेब 75% WP @ 350-400 ग्राम /एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% WP @ 200-250 ग्राम /एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें|

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