High yielding moong varieties in summer

गर्मियों में उच्च उपज देने वाली मूंग:-विराट, सम्राट, खरगोन 1, कृष्णा 11, जवाहर 45, कोपरगाँव, मोहिनी (S-8), PS 16, पंत मूंग 3, पूसा 105, ML 337, पीडीएम 11 (बसंत) टाइप 1, टाइप 4, टाइप 51, K851, पूसा बैसाखी

  • विराट, सम्राट, खरगोन 1, कृष्णा 11, जवाहर 45, कोपरगाँव, मोहिनी (S-8), PS 16, पंत मूंग 3, पूसा 105, ML 337, पीडीएम 11 (बसंत) टाइप 1, टाइप 4, टाइप 51, K851, पूसा बैसाखी, 6, PS 10, PS 7, पंत मुंग 2, ML-267, पुसा 105, ML-337, पंत मुंग 1, RUM-1, RUM-12, बीएम -4, पीडीएम -54, जेएम -72, के -851, पीडीएम -11.

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Seed rate in green gram (Moong)

मुंग की बीज दर:- खरीफ के मौसम के लिए, बीज दर 8-9 किग्रा / एकड़ का उपयोग करें जबकि गर्मियों के मौसम में बीज की दर 12-15 किग्रा / एकड़ हैंं।

  • खरीफ के मौसम के लिए, बीज दर 8-9 किग्रा / एकड़ का उपयोग करें जबकि गर्मियों के मौसम में बीज की दर 12-15 किग्रा / एकड़ हैंं।

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Suitable soil for green gram (Moong) cultivation

मुँग की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी:-मूंग को रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी में अच्छी तरह से उगाया जा सकता हैंं जिसकी जल निकास क्षमता अच्छी हो|

  • मूंग को रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी में अच्छी तरह से उगाया जा सकता हैंं जिसकी जल निकास क्षमता अच्छी हो|
  • लवणीय और क्षारीय मिट्टी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती हैंं।
  • जल भराव को बिलकुल सहन नहीं कर पाती हैं|

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Sowing time of green gram (moong)

मूंग की बुवाई का समय:- खरीफ बुवाई के लिए उत्तम समय जुलाई का पहला पखवाड़ा हैंं। ग्रीष्म कालीन मूंग की खेती के लिए उत्तम समय मार्च से अप्रैल तक हैंं।

  • खरीफ बुवाई के लिए उत्तम समय जुलाई का पहला पखवाड़ा हैंं। ग्रीष्म कालीन मूंग की खेती के लिए उत्तम समय मार्च से अप्रैल तक हैंं।

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Climatic conditions for green gram (moong) cultivation

मूंग की खेती के लिए जलवायु:- मूंग की खेती के लिए उत्तम जलवायु गर्म आर्द्र और तापमान 25-35℃ होना चाहिए| मुंग के लिए वह क्षेत्र सबसे उपयुक्त हैं जहां वार्षिक वर्षा 60-75 cm होती हैं|

  • मूंग की खेती के लिए उत्तम जलवायु गर्म आर्द्र और तापमान 25-35℃ होना चाहिए|
  • मुंग के लिए वह क्षेत्र सबसे उपयुक्त हैं जहां वार्षिक वर्षा 60-75 cm होती हैं|
  • बुवाई के समय तापमान 25-30℃ अच्छा माना जाता हैंं।
  • कटाई के समय तापमान 30-35℃ अच्छा माना जाता  हैंं।
  • मुंग को सभी दलहनी फसलों में सबसे सख्त माना जाता है और यह काफी हद तक सूखे को सहन कर सकता है।
  • हालांकि, जल जमाव और बादल वाला मौसम फसल के लिए हानिकारक है।
  • यह देश में तीनों मौसमों में उगाया जाता है।

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Seed Treatment in green gram

मुंग का बीजोपचार:- बुवाई से पहले बीज को कार्बोक्सिन 37.5 +थायरम 37.5 @ 2.5 ग्राम / किलोग्राम बीज से उपचारित करना चाहिये।

बुवाई से पहले बीज को कार्बोक्सिन 37.5 + थायरम  37.5 @ 2.5 ग्राम / किलोग्राम बीज से उपचारित करना चाहिये।

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Selection of seed in moong

मूंग बीज का चयन:- स्वस्थ,अच्छी गुणवत्ता वाले बीज चुनें। अधिक उपज देने के लिए अच्छी प्रजातियों का चुनाव करें। बीज रोग रहित होना चाहिये।

  • स्वस्थ,अच्छी गुणवत्ता वाले बीज चुनें।
  • अधिक उपज देने के लिए अच्छी प्रजातियों का चुनाव करें।
  • बीज रोग रहित होना चाहिये।
  • बीज का अंकुरण अच्छा होना चाहिये।
  • किसानों को अंकुरण की अवधि, पोषक तत्वों की आवश्यकता की भी जांच करनी चाहिये।
  • कुछ बीज रोग युक्त होते हैं; उनका उपयोग करने से पहले बीजो को उचित फफूंदी नाशक और कीटनाशक दवाओं से  उपचार करके ही बोना चाहिये।

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Land Preparation in Green gram (Moong)

मुंग के लिए भूमि की तैयारी:- खरीफ की फसल हेतु एक गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करना चाहिए एंव वर्षा प्रारम्भ होते ही 2-3 बार देशी हल या कल्टीवेटर से जुताई कर खरपतवार रहित करने के उपरान्त खेत में पाटा चलाकर समतल करें।

  • खरीफ की फसल हेतु एक गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करना चाहिए एंव वर्षा प्रारम्भ होते ही 2-3 बार देशी हल या कल्टीवेटर से जुताई कर खरपतवार रहित करने के उपरान्त खेत में पाटा चलाकर समतल करें।
  • दीमक से बचाव के लिये क्लोरपायरीफॉस 1.5 % डी.पी.चूर्ण 10-15 कि.ग्रा/एकड़ के मान से खेत की तैयारी के समय मिट्टी में मिलाना चाहिये।
  • ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती के लिये रबी फसलों के कटने के तुरन्त बाद खेत की तुरन्त जुताई कर 4-5 दिन छोड कर पलेवा करना चाहिए।
  • पलेवा के बाद 2-3 जुताइयाँ देशी हल या कल्टीवेटर से कर पाटा लगाकर खेत को समतल एवं भुरभुरा बनावे। इससे उसमें नमी संरक्षित हो जाती है व बीजों से अच्छा अंकुरण मिलता हैं।

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Yellow Mosaic Virus in Legumes crops

पीला मौजेक वायरस :- पीला मौजेक वायरस मुख्य रूप से खरीफ मौसम में सोयाबीन, उड़द, मूग व कुछ अन्य फसलो में भी होता हैं |  सोयाबीन, उड़द आदि फसलो में रोग के प्रकोप से काफी नुकसान

पीला मौजेक वायरस :- पीला मौजेक वायरस मुख्य रूप से खरीफ मौसम में सोयाबीन, उड़द, मूग व कुछ अन्य फसलो में भी होता हैं |  सोयाबीन, उड़द आदि फसलो में रोग के प्रकोप से काफी नुकसान होता हैं | इससे पैदावार पर बुरा प्रभाव होता हैं, यह रोग 4-5 दिनों में पुरे खेत में फ़ैल जाता हैं और फसल पीली पड़ने लगती हैं रोग फैलाने मे मुख्य भूमिका सफ़ेद मक्खी की होती हैं |       

रोग फेलने  के मुख्य कारण :-

  • यह विषाणु जनित रोग रस चूसक कीट व सफ़ेद मक्खी से फैलता हैं |
  • बीजो का उचित उपचार नहीं किया जाना | साथ ही जानकारी का अभाव होना व लम्बे समय तक सुखा पड़ना भी वायरस को फैलाने में सहयोगी रहता हैं |
  • कीटनाशको का अन्धाधुंध प्रयोग करना बिना उचित जानकारी के दवाइयों का मिश्रण कर उनका छिडकाव करना |
  • किसानो द्वारा उचित फसल चक्र नहीं अपनाये जाना इसका मुख्य कारण होता हैं |
  • खेतो के चारो और मेड़ो की सफाई नहीं होने के कारण भी फैलता हैं |
  • सफ़ेद मक्खी पौधो के पत्ते पर बैठ कर रस चूसती है ओर लार वही छोड़ने से बीमारी का प्रकोप बढता हैं |

 रोग के  लक्षण :-

  • प्रारंभिक अवस्था में गहरे पीले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं|
  • रोग ग्रस्त पोधे की पत्तिया पीली पड़ जाती हैं |
  • रोगग्रस्त पोधे की पतियों की नसे साफ़ दिखाई देने लगती है |
  • पोधे की पत्तिया खुरदुरी हो जाती हैं |
  • ग्रसित पोधा छोटा रह जाता हैं|

रोकथाम के उपाय :-

यांत्रिक विधि :-

  • प्रारंभिक अवस्था मे रोग ग्रसित पौधो को खेत से उखाड़ कर जला दे |
  • खेत मे सफ़ेद मक्खी को आकर्षित करने के लिए  प्रति हक्टेयर 5-6 पीले प्रपंच लगाये |
  • फसल के चारो और जाल के रूप मे गेंदे की फसल लगाये |

जैविक विधि :-

  • प्रारंभिक अवस्था मे पौधो मे नीम तेल छिडकाव 1-1.5 ली. प्रति एकड़ चिपकने वाले पदार्थ मे मिलाकर 200-250 ली. पानी का घोल बना कर करे
  • 2 किलो सहजन की पत्तियों को बारीक़ पीसकर 5 ली. गोमूत्र और 5 ली. पानी मिलकर गला दे| 5 दिन बाद पानी छान ले| 500 मिलीलीटर घोल को 15 लीटर पानी मे मिलाकर फसल पर छिडकाव करे | यह फसल मे टॉनिक का काम करेगा |

रासायनिक विधि :-

  • डाइमिथिएट  250-300 मिलीलीटर  या थायोमेथाक्सोम 25WP 40 ग्राम  या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL 40 मिलीलीटर  या एसिटामाप्रीड 40 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200-250 लीटर पानी का घोल बनाकर छिडकाव करे |  

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Control of White fly in Green Gram

मुंग में सफ़ेद मक्खी का नियंत्रण:- शिशु एवं वयस्क पत्तियों के निचले सतह से रस चूसते है एवं मधु स्त्राव के उत्सर्जन से प्रकाश संश्लेषण में बाधा आती है| पत्तियाँ रोगग्रस्त दिखती है सुटी मोल्ड से ढक जाती है | यह कीट पत्ति मोड़क विषाणु रोग व पीला शिरा विषाणु रोग का वाहक होकर इसे फैलाता है|……………

मुंग में सफ़ेद मक्खी का नियंत्रण:-

  • शिशु एवं वयस्क पत्तियों के निचले सतह से रस चूसते है एवं मधु स्त्राव के उत्सर्जन से प्रकाश संश्लेषण में बाधा आती है|
  • पत्तियाँ रोगग्रस्त दिखती है सुटी मोल्ड से ढक जाती है | यह कीट पत्ति मोड़क विषाणु रोग व पीला शिरा विषाणु रोग का वाहक होकर इसे फैलाता है|
  • नियंत्रण:- पीले रंग वाले चिपचिपे प्रपंच खेत में कई जगह लगाए|
  • डायमिथोएट 30 मिली./पम्प या थायमेथोक्जोम 5 ग्राम/पम्प या एसीटामीप्रिड 15 ग्राम/ पम्प का स्प्रे 4-5 बार 10 दिन के अंतराल पर करे|

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