Thrips control in tomato

टमाटर में थ्रिप्स (तैला) का नियंत्रण:-थ्रिप्स पौधों का रस चूसता हे जिससे पौधे पीले व कमज़ोर हो जाते है उपज कम होती है|

  • थ्रिप्स पौधों का रस चूसता हे जिससे पौधे पीले व कमज़ोर हो जाते है उपज कम होती है|
  • इसके नियंत्रण के लिए प्रोफेनोफोस 3 मिली. प्रति ली. पानी या फिप्रोनिल 3 मिली. प्रति ली. पानी  या थायमेथोक्जोम 0.5 ग्राम प्रति ली. पानी का स्प्रे हर 10 दिन के अंतराल पर करे |

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Control measures of thrips in muskmelon

खरबूज में थ्रिप्स के नियंत्रण के उपाय :-शिशु एवं वयस्क पत्तियों को खुरचकर रस चूसते हैं। कोमल डंठल, कलियों व फूलों पर प्रकोप होने पर वे टेढी मेढी हो जाती हैं।  पौधे छोटे रह जाते हैं।

  • शिशु एवं वयस्क पत्तियों को खुरचकर रस चूसते हैं। कोमल डंठल, कलियों व फूलों पर प्रकोप होने पर वे टेढी मेढी हो जाती हैं।  पौधे छोटे रह जाते हैं।
  • डायमिथोएट 30% ईसी @ 250 मिली /एकड़ या प्रोफेनोफोस 50% ईसी @ 400 मिली प्रति एकड़ या फिप्रोनिल 5% एससी @ 400 मिली की दर से 15 दिन के अन्तराल से छिड़काव करें।
  • कीटनाशक को 15 दिनों के अंतराल में बदलकर उपयोग करें।

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Control measures of thrips in watermelon

तरबूज में थ्रिप्स के नियंत्रण के उपाय :-शिशु एवं वयस्क पत्तियों को खुरचकर रस चूसते हैं। कोमल डंठल, कलियों व फूलों पर प्रकोप होने पर वे टेढी मेढी हो जाती हैं।  पौधे छोटे रह जाते हैं।…

  • शिशु एवं वयस्क पत्तियों को खुरचकर रस चूसते हैं। कोमल डंठल, कलियों व फूलों पर प्रकोप होने पर वे टेढी मेढी हो जाती हैं।  पौधे छोटे रह जाते हैं।
  • डायमिथोएट 30% ईसी @ 250 मिली /एकड़ या प्रोफेनोफोस 50% ईसी @ 400 मिली प्रति एकड़ या फिप्रोनिल 5% एस सी @ 400 मिली की दर से 15 दिन के अन्तराल से छिड़काव करें।
  • कीटनाशक को 15 दिनों के अंतराल में बदलकर उपयोग करें।

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Management of Thrips in Cotton

कपास में थ्रिप्स का प्रबंधन:- थ्रिप्स के शिशु एवं वयस्क पत्तियों के ऊपर एवं नीचे से उत्तकों को फाड़ कर रस चूसते हैं | वे लार उत्तकों में छोड़ते हैं और पौधों की कोशिकाओं का रस को चूसते हैं जिसके परिणामस्वरूप चांदी जैसे या भूरे रंग के उत्तकक्षय धब्बे बनते हैं।…………….

कपास में थ्रिप्स का प्रबंधन:-

  • थ्रिप्स के शिशु एवं वयस्क पत्तियों के ऊपर एवं नीचे से उत्तकों को फाड़ कर रस चूसते हैं | वे लार उत्तकों में छोड़ते हैं और पौधों की कोशिकाओं का रस को चूसते हैं जिसके परिणामस्वरूप चांदी जैसे या भूरे रंग के उत्तकक्षय धब्बे बनते हैं।
  • थ्रिप्स से ग्रसित छोटे पौधे की बढ़वार धीमे हो जाते हैं और पत्तियां के ऊपर चमकदार कर्ल बन जाती हैं और सफेद चमकदार पैच के साथ विकृत हो जाती हैं। पत्तियों की सतह के नीचे जंग जैसे पेंच विकसित होती है|
  • फसल के वनस्पति विकास के दौरान अधिक प्रकोप होने पर कली देर से बनती हैं|
  • फल वाली अवस्था में अधिक थ्रिप्स लगने से घेटे गिरते हैं और फसल देर से आती है और उपज काम होती है | घेंटे बनते समय थ्रिप्स लगने से रेशे के गुणवत्ता कम हो जाती है |

प्रबंधन:-

  • बीज उपचार :- कपास के बीज को इमिडाक्लोप्रिड 60 एफएस @ 10 मिलीग्राम / किलोग्राम या थायोमेथॉक्सम 70 डब्ल्यूएस @ 5 ग्राम / किलोग्राम बीज से उपचारित करने से रस चूसक कीटों का प्रकोप शुरुआती अवस्था में कम हो जाता है |
  • कपास की फसल को खरपतवार मुक्त रखने से थ्रिप्स का फैलाव कम होता हैं|
  • जब थ्रिप्स का प्रकोप अधिक हो एवं मौसम साफ़ हो तब कीटनाशी का प्रयोग करना चाहिए|
  • फसल की शुरुआती अवस्था में खेत पर तैयार नीम सीड करनैल एक्सट्रेक्ट या नीम तेल @ 75 ml प्रति पंप तथा अच्छे फैलाव के लिए इसमें वाशिंग पाउडर 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के अनुसार मिला कर स्प्रे करने से थ्रिप्स की संख्या को रोका हैं|
  • कीटनाशक का प्रयोग:- निम्न में से किसी एक कीटनाशक का स्प्रे करें |
  1. प्रोफेनोफॉस 50% @ 50 मिली प्रति पम्प
  2. ऐसीटामाप्रीड 20% @ 15 ग्राम प्रति पम्प
  3. इमीडाक्लोरप्रिड 17.8% @ 7 मिली प्रति पम्प
  4. थायोमेथॉक्सम 25% @ 5 ग्राम प्रति पम्प
  5. फिप्रोनिल 5% @ 50 मिली प्रति पम्प

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Management of Chilli Thrips

मिर्च में थ्रिप्स का प्रबंधन:- रोग से ग्रस्तित पत्तिया ऊपर की और मुड़ती हुई दिखाई देती है| कलिया नाज़ुक हो कर गिर जाती है| शुरूआती अवस्था में फसल की वृद्धि और फूलो की मात्रा में कमी आती है |…………..

मिर्च में थ्रिप्स का प्रबंधन:-

लक्षण :-

  • रोग से ग्रस्तित पत्तिया ऊपर की और मुड़ती हुई दिखाई देती है|
  • कलिया नाज़ुक हो कर गिर जाती है|
  • शुरूआती अवस्था में फसल की वृद्धि और फूलो की मात्रा में कमी आती है |

प्रबंधन:-

  • ज्वार की फसल के बाद मिर्च की फसल नहीं लगाना चाहिए |
  • मिर्च और प्याज की मिश्रित खेती ना करें|
  • बीज का उपचार इमिडाक्लोप्रिड 70% डब्ल्यूएस @ 12 ग्राम / किग्रा  से करें|
  • कार्बोफुरन 3% जी @ 33 किलो / हेक्टेयर या फोरेट 10% जी @ 10 किलो / हेक्टेयर जमीन से दें |
  • इनमे से किसी एक कीटनाशक का छिड़काव करे |

 

           कीटनाशक मात्रा
इमिडाक्लोप्रिड 17.8 % एस.एल. 100 मिलि/एकड़
डायमिथोएट 30 % ईसी 300 मिलि/एकड़
इमामेक्टिन बेन्झोएट 5 % एसजी 100 ग्राम/एकड़
प्रोफेनोफोस  50% ईसी 500 मिली/एकड़
फिप्रोनिल 5 % एससी 500 मिलि/एकड़
स्पिनोसेड  45 % एससी 70 मिली/एकड़

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