Thrips control in tomato

टमाटर में थ्रिप्स (तैला) का नियंत्रण:-थ्रिप्स पौधों का रस चूसता हे जिससे पौधे पीले व कमज़ोर हो जाते है उपज कम होती है|

  • थ्रिप्स पौधों का रस चूसता हे जिससे पौधे पीले व कमज़ोर हो जाते है उपज कम होती है|
  • इसके नियंत्रण के लिए प्रोफेनोफोस 3 मिली. प्रति ली. पानी या फिप्रोनिल 3 मिली. प्रति ली. पानी  या थायमेथोक्जोम 0.5 ग्राम प्रति ली. पानी का स्प्रे हर 10 दिन के अंतराल पर करे |

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Picking of Tomato

टमाटर की तुड़ाई:- टमाटर की तुड़ाई उसके उपयोग पर निर्भर करती हैं आमतौर पर चार अवस्थाएँ पहचानी गयी हैं|..

टमाटर की तुड़ाई उसके उपयोग पर निर्भर करती हैं आमतौर पर चार अवस्थाएँ पहचानी गयी हैं|

  • हरा फल:- पूरी तरह से विकसित हरा फल लम्बी दूरी के बाज़ार के लिए तोड़ा जाता हैं|
  • गुलाबी फल:- फलों के सिरे का रंग गुलाबी या लाल होने लगता हैं तब फलों को लोकल बाज़ार के लिए तोड़ा जाता हैं|
  • परिपक्व फल:- फल लगभग लाल हो जाता हैं और कोमल होना शुरू होता हैं|
  • पूर्ण परिपक्व फल:- फल पूरी तरह लाल और कोमल हो जाता हैं| ऐसे फलों को डिब्बा बंदी और प्रोसेसिंग के लिए तोड़ा जाता हैं|

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How to improve flowering in tomato

टमाटर में फूलों की वृद्धि के लिए सुझाव:- टमाटर में फूल वाली अवस्था बहुत ही महत्वपूर्ण होती हैंं| टमाटर के उत्पादन में फूलों की संख्या का बड़ा महत्तव हैंं|

  • नीचे दिए गए कुछ उत्पादों के द्वारा टमाटर की फसल में फूलों की संख्या को बढ़ाया जा सकता हैंं|
  • होमोब्रासिनोलॉइड 0.04% डब्लू/डब्लू 100-120 मिली/एकड़ का स्प्रे करें|
  • समुद्री शैवाल का सत् 180-200 मिली /एकड़ का उपयोग करें|
  • सूक्ष्म पोषक तत्त्व 300 ग्राम/एकड़ का स्प्रे करें|

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Control of leaf curl disease in tomato

टमाटर में लीफ कर्ल रोग का नियंत्रण:- पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ जाती हैंं एवं पत्तियों का आकार छोटा रह जाता हैंं। पौधे में अत्यधिक मात्रा में शाखाएँ निकल आती हैंं एवं वृद्धि रूक जाती हैंं।…

  • पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ जाती हैंं एवं पत्तियों का आकार छोटा रह जाता हैंं।
  • पौधे में अत्यधिक मात्रा में शाखाएँ निकल आती हैंं एवं वृद्धि रूक जाती हैंं।
  • पुरानी पत्तियाँ मोटी चमड़े जैसी एवं भंगुर हो जाती हैंं।
  • प्रभावित अवस्था में पौधों को उखाड़कर अलग करे।
  • खेत में टमाटर की रोपाई के 2 महीने पहले खेत के चारों तरफ ज्वार, बाजरा एवं मक्के की 5-6 कतार को इस विषाणु को फैलने से रोकने के लिये लगाना चाहिये।
  • वाहक (सफेद मक्खी) को रोकने के लिये डायमेथोएट 30% EC का 300 मि.ली. प्रति एकड़ की दर से 15 दिन के अंतराल से छिड़काव करें।

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Advantages of PSB in Tomato

फास्फोरस घोलक जीवाणु का टमाटर की फसल में महत्व:-ये जीवाणु फास्फोरस के साथ साथ मैंगनीज, मैगनेशियम, आयरन, मॉलिब्डेनम, जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों को भी पौधे में उपलब्ध करवाने में सहायक होते है|

  • ये जीवाणु फास्फोरस के साथ साथ मैंगनीज, मैगनेशियम, आयरन, मॉलिब्डेनम, जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों को भी पौधे में उपलब्ध करवाने में सहायक होते है|
  • तेजी से जड़ों का विकास करने में सहायक होता है जिससे पानी और पोषक तत्व आसानी से पौधों को प्राप्त होते है |
  • पीएसबी कुछ खास जैविक अम्ल बनाते है जैसे मैलिक, सक्सेनिक, फ्यूमरिक, साइट्रिक, टार्टरिक एसिड और एसिटिक एसिड ये अम्ल फॉस्फोरस उपलब्धता बढ़ाते है|
  • रोगों और सूखा के प्रति प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाता है|
  • इसका उपयोग करने से  25 -30% फॉस्फेटिक उर्वरक की आवश्यकता कम होती है ।

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Nutrient management in tomato

टमाटर में पोषक तत्व प्रबंधन:- भूमि की तैयारी के समय गोबर की खाद / कम्पोस्ट @ 6-8 टन / एकड़ की दर से डालें और मिट्टी में अच्छी तरह से  मिलाएँ।

  • भूमि की तैयारी के समय गोबर की खाद / कम्पोस्ट @ 6-8 टन / एकड़ की दर से डालें और मिट्टी में अच्छी तरह से  मिलाएँ।
  • डीएपी @ 70 किलो, यूरिया @ 105 किलो, एमओपी @ 50 किलो/एकड़ प्रयोग करें।
  • नाइट्रोजन का एक चौथाई और पोटाश का आधा हिस्सा बोने के 20-30 दिनों बाद प्रयोग किया जा सकता है।
  • बोरेक्स 4 किलो और जिंक सल्फेट 20 किलो/एकड़ को बेसल डोज़ के रूप में और यूरिया बोने के 30 वें दिन 30 किग्रा / एकड़ प्रयोग करें ।

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Irrigation in Tomato

टमाटर में सिंचाई:-फसल की प्रायः 8-12 दिनों के अंतराल से सिंचाई की जाती है। ग्रीष्म ऋतु में फसल को 5-6 दिनों के अंतराल से सिंचाई की आवश्यक होती है। प्रायः सिंचाई हेतु खुली नाली (ओपन फरो) विधि का प्रयोग किया जाता है।…

  • फसल की प्रायः 8-12 दिनों के अंतराल से सिंचाई की जाती है।
  • ग्रीष्म ऋतु में फसल को 5-6 दिनों के अंतराल से सिंचाई की आवश्यक होती है।
  • प्रायः सिंचाई हेतु खुली नाली (ओपन फरो) विधि का प्रयोग किया जाता है।
  • फूल की अवस्था में पानी की कमी होने पर उत्पादन एवं फलन पर बुरा प्रभाव पड़ता हैं|

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Nutrient management of Tomato

टमाटर में खाद और उरर्वकों मात्रा:-टमाटर की अच्छी उपज के लिये उर्वरक की आवश्यकता अधिक होती है। रोपण के एक माह पहले गोबर की खाद को 8-10 टन प्रति एकड़ की दर से खेत में मिलाया जाता है। डीएपी 50 किलो/एकड़,

  • टमाटर की अच्छी उपज के लिये उर्वरक की आवश्यकता अधिक होती है।
  • रोपण के एक माह पहले गोबर की खाद को 8-10 टन प्रति एकड़ की दर से खेत में मिलाया जाता है।
  • डीएपी 50 किलो/एकड़, युरिया 80 किलों प्रति एकड़ एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो /एकड़
  • पौध रोपण के पहले  युरिया की आधी मात्रा और डीएपी एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश की पूर्ण मात्रा खेत में मिलाया जाता है।
  • पौध रोपण के 20-25 दिनों के उपरांत युरिया की दूसरी मात्रा एवं तीसरी मात्रा 45-60 दिनों में देना चाहिये।
  • जिंक सल्फेट 10 किलो/एकड़ एवं बोरॉन 4 किलो/एकड़ की मात्रा उपज में वृद्धि के साथ फलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।

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Sowing time Suitable of Tomato Cultivation-

टमाटर की बुवाई का समय-टमाटर खरीफ, रबी एवं जायद तीनो ही मौसम में उगाया जा सकता है| रबी के मौसम में पाला पड़ने की दिक्कत होने के कारण इसकी उपज कम होती हैं| खरीफ के मौसम में फसल लेने के लिए इसकी चोपाई जुलाई माह में की जाती है|

  • टमाटर खरीफ, रबी एवं जायद तीनो ही मौसम में उगाया जा सकता है|
  • रबी के मौसम में पाला पड़ने की दिक्कत होने के कारण इसकी उपज कम होती हैं|
  • खरीफ के मौसम में फसल लेने के लिए इसकी चोपाई जुलाई माह में की जाती है|
  • रबी के मौसम में फसल लेने के लिए इसकी चोपाई जुलाई माह में की जाती है|
  • जायद में फसल लेने के लिए फरवरी माह में चोपाई की जाती है|

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Management of Root Knot Nematodes in Tomato

टमाटर में जड़ ग्रंथि सूत्रकृमि:-पत्तियों का रंग हल्का पीला हो जाता है| सूत्रकृमि से ग्रसित पौधों की वृद्धि रुक जाती है एवं पौधा छोटा ही रहता है| अधिक संक्रमण होने पर पौधा सुखकर मर जाता है|….

टमाटर में जड़ ग्रंथि सूत्रकृमि:-

हानि:-

  • पत्तियों का रंग हल्का पीला हो जाता है|
  • सूत्रकृमि से ग्रसित पौधों की वृद्धि रुक जाती है एवं पौधा छोटा ही रहता है| अधिक संक्रमण होने पर पौधा सुखकर मर जाता है|

नियंत्रण:-

  • प्रतिरोधक किस्मों को उगाये|
  • ग्रीष्म ऋतू में भूमि की गहरी जुताई करें|
  • नीम खली 80 किलो प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए|
  • कार्बोफ्युरोन 3% G 8 किलो प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए|
  • पेसिलोमाइसेस लिलासिनास -1% डब्ल्यूपी, बीज उपचार के लिए 10 ग्राम / किलोग्राम बीज, 50 ग्राम / मीटर वर्ग नर्सरी उपचार, 2.5 से 5 किलो / हेक्टेयर जमीन से देने के लिए 

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