Maturity signs of watermelon

तरबूज में फल पकने की पहचान:-फल बुआई के 90 -120 दिन बाद तोड़ने लायक हो जाते हैं| पके हुए फलों पर हाथ से थप्पी देने पर भारी आवाज़ निकलती हैं| लेकिन अपरिपक्व फल मे से मेटलिक साउंड आता हैं|…

  • फल बुआई के 90 -120 दिन बाद तोड़ने लायक हो जाते हैं|
  • पके हुए फलों पर हाथ से थप्पी देने पर भारी आवाज़ निकलती हैं| लेकिन अपरिपक्व फल मे से मेटलिक साउंड आता हैं|
  • जमीन की सतह से लगा तरबूज का भाग सफ़ेद से पीला होने लगता हैं|
  • फल से लगा डंठल सूखने लगता हैं |
  • कुछ किस्मों में फल की सतह पर हाथ फेरने से परिपक्वता का अंदाज़ा लग जाता हैं|

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Anthracnose control in watermelon

तरबूज में एन्थ्रेकनोज का नियंत्रण:- खेतों को साफ रखे एवं उचित फसल चक्र अपनाकर बीमारी के फैलने से रोकना चाहिये। बीजों को कार्बोंन्डाजिम 50% WP से 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।

  • खेतों को साफ रखे एवं उचित फसल चक्र अपनाकर बीमारी के फैलने से रोकना चाहिये।
  • बीजों को कार्बोंन्डाजिम 50% WP से 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।
  • 10 दिनों के अंतराल से मेंकोजेब 75% डब्ल्यूपी @ 400 ग्राम प्रति एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% डब्ल्यूपी @ 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

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Downy mildew control in watermelon

तरबूज में डाऊनी मिल्ड्यू (मृदुरोमिल आसिता) नियंत्रण:- पत्तियों की निचली सतह पर पानी वाले धब्बे बन जाते हैं| जब पत्तियों के निचली सतह पर पानी वाले धब्बे होता हैंं, प्रायः उसी के अनुरूप ही……..

  • पत्तियों की निचली सतह पर पानी वाले धब्बे बन जाते हैं|
  • जब पत्तियों के निचली सतह पर पानी वाले धब्बे होता हैंं, प्रायः उसी के अनुरूप ही ऊपरी सतह पर कोणीय धब्बे बनते हैंं।
  • धब्बे सबसे पहले पुरानी पत्तियों पर बनते हैंं जो धीरे-धीरे नई पत्तियों पर फैलते हैंं।
  • जब धब्बे फैलने लगते हैं तो यह पीली और फिर भूरे एवं सूखे हुए होते हैं|
  • ग्रसित लताओं पर फल नही लगते हैंं।
  • प्रभावित पत्तियों को तोड़कर नष्ट कर दें।
  • मैंकोजेब 75% WP @ 350-400 ग्राम / एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% WP @ 200-250 ग्राम / एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें|
  • फसल चक्र को अपना कर एवं खेत की सफाई कर रोग की आक्रामकता को कम कर सकते हैंं।

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Control measures of root-knot nematode in watermelon

तरबूज में जड़ गाँठ निमेटोड के नियंत्रण के उपाय:- मादा जड़ के अंदर, जड़ के ऊपर एवं नष्ट जड़ों में अण्डे देती हैंं । अण्ड़ों से निकले नवजात जड़ की ओर आ जाते हैंं । ये जड़ की कोशिकाओं को खाते हैंं ।

  • मादा जड़ के अंदर, जड़ के ऊपर एवं नष्ट जड़ों में अण्डे देती हैंं ।
  • अण्ड़ों से निकले नवजात जड़ की ओर आ जाते हैंं । ये जड़ की कोशिकाओं को खाते हैंं ।
  • पत्तियों का रंग हल्का पीला हो जाता हैंं ।
  • निमेटोड से ग्रसित पौधों की वृद्धि रुक जाती हैंं एवं पौधा छोटा ही रहता हैंं ।
  • धिक संक्रमण होने पर पौधा सूखकर मर जाता हैंं ।
  • ग्रीष्म ऋतु में भूमि की गहरी जुताई करें ।
  • पौधशाला की मिट्टी या क्यारियों को सौर उर्जा से उपचारित करें ।
  • नीम की खली का 200 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें ।
  • पैसिलोमीसेस लीलासिनस 1 % डब्लू पी  की 2-4 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से अच्छे  से सड़ी हुई गोबर की खाद में मिला कर खेत की तैयारी के समय उपयोग कर के भी निमेटोड का प्रभावी नियंत्रण किया  जाता हैंं |

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Blossom-end rot in watermelon

तरबूज में फल सिरा सड़न का प्रबंधन:-तरबूज के फल के छोर में गहरी सडी गली और सिकुड़न जैसी संरचना बनती हैंं।
सामान्यत: यह पानी देने का अंतराल कम या अधिक होने के कारण होता हैंं।…

  • तरबूज के फल के छोर में गहरी सडी गली और सिकुड़न जैसी संरचना बनती हैंं।
  • सामान्यत: यह पानी देने का अंतराल कम या अधिक होने के कारण होता हैंं।
  • जब खेत की मिट्टी बहुत सुखी हो जाती हैंं, तो कैल्शियम मिट्टी में रह जाता हैंं और पौधों को प्राप्त नही हो पाता हैंं।
  • इस रोग का दूसरा कारण खेत की मिट्टी में कैल्शियम की कमी होना भी होता हैंं।

प्रबंधन:-

  • तरबूज लगने पर खेत में 1-1.5 इंच गहरी सिंचाई प्रति सप्ताह करे जिससे सडन लगने से बचाया जा सकता हैंं।     
  • तरबूज के फलो को इस रोग से बचने के लिए प्लास्टिक मल्च या सुखी घास को लताओं एवं फलो के नीचे जमीन पर रख देते हैंं।
  • मृदा में कैल्शियम की कमी होने पर कैल्शियम नाइट्रेट @ 25 किलोग्राम /एकड़ की मात्रा का उपयोग फ़ायदेमंद रहेगा।
  • चिलेटेड कैल्शियम EDTA @ 200 ग्राम / एकड़ का छिडकाव करे।

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Pinching in watermelon

तरबूज की गुणवत्ता बढ़ाने के उपाय:- तरबूज की फसल में लताओं की अतिवृद्धि को रोकने हेतु एवं फलो के अच्छे विकास के लिए तरबूज की लताओं में यह प्रक्रिया अपनाई जाती है |

  • तरबूज की फसल में लताओं की अतिवृद्धि को रोकने हेतु एवं फलो के अच्छे विकास के लिए तरबूज की लताओं में यह प्रक्रिया अपनाई जाती है |
  • इस प्रक्रिया में जब बेल पर पर्याप्त फल लग जाते है तब लताओं के शीर्ष को तोड़ दिया जाता है | परिणाम स्वरूप लताओं की वानस्पतिक वृद्धि रुक जाती है |
  • शीर्ष को तोड़ने से लताओं की वृद्धि रुक जाती है जिससे फलो के आकर और गुणवत्ता में सुधार होता है |
  • यदि एक बेल पर अधिक फल लगे हो तो, छोटे और कमजोर फलो को हटा दे ताकि मुख्य फल की वृद्धि अच्छी हो सके |
  • अनावश्यक शाखाओं को हटाने से तरबूज को पूरा पोषण प्राप्त होता हे और वह जल्दी बडे होते हें  |

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Boron deficiency symptoms and control in watermelon

तरबूज में बोरॉन की कमी के लक्षण और उससे बचाव के उपाय :- नई पत्तियों सिकुड़ी हुई होती हैं जो की सामान्य पत्तियों की तुलना में छोटी होती हैं| पत्तियों में पीलापन दिखने लगता हैं जो की सिरों के आस पास ज्यादा होता है|

  • नई पत्तियों सिकुड़ी हुई होती हैं जो की सामान्य पत्तियों की तुलना में छोटी होती हैं|
  • पत्तियों में पीलापन दिखने लगता हैं जो की सिरों के आस पास ज्यादा होता है|
  • नई पत्तियों के सिरे सूखे हुए दिखाई देते हैं|
  • तने की सतह फटने लगती हैं साथ ही लताओं की लम्बाई कम हो जाती हैं |
  • पौधे का विकास रुक जाता हैं वह बोना रह जाता हैं|
  • बेल का शीर्ष मर जाता हैं और फुल और फलो दोनों की संख्या कम हो जाती हैं |
  • फलो में खोखला पन होना बोरान की कमी का मुख्य लक्षण हैं|
  • खेत में अधिक नमी होने पर या pH अधिक होने पर यह आमतोर पर देखने को मिलती हैं |

नियंत्रण:-

  • बोरॉन युक्त कैल्शियम नाइट्रेट 25 किलो प्रति एकड़ के अनुसार जमीन से दें|
  • फॉस्फोरस घुलनशील बैक्टेरिया 4 किलो प्रति एकड़ के अनुसार दें|
  • बोरॉन 20% @ 200 ग्राम प्रति एकड़ के अनुसार फूल की अवस्था पर दो बार स्प्रे करें|

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Control measures of aphids in Watermelon

तरबुज में एफिड(माहु) का नियंत्रण:- ग्रसित पौधों को उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिये ताकि यह कीट फैलने न पाये।

  • ग्रसित पौधों को उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिये ताकि यह कीट फैलने न पाये।
  • माहू का प्रकोप दिखाई देने पर एसीफेट 75 % एसपी @ 300- 400 ग्राम / एकड़ या इमिडाक्लोप्रिड 17% एस एल @ 100 मिली प्रति एकड या एसीटामाप्रिड 20 % एसपी @ 150 ग्राम  प्रति एकड़ की दर से घोल बनाकर पंद्रह दिन के अंतराल से छिड़काव कर इनका प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है |

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Control measures of thrips in watermelon

तरबूज में थ्रिप्स के नियंत्रण के उपाय :-शिशु एवं वयस्क पत्तियों को खुरचकर रस चूसते हैं। कोमल डंठल, कलियों व फूलों पर प्रकोप होने पर वे टेढी मेढी हो जाती हैं।  पौधे छोटे रह जाते हैं।…

  • शिशु एवं वयस्क पत्तियों को खुरचकर रस चूसते हैं। कोमल डंठल, कलियों व फूलों पर प्रकोप होने पर वे टेढी मेढी हो जाती हैं।  पौधे छोटे रह जाते हैं।
  • डायमिथोएट 30% ईसी @ 250 मिली /एकड़ या प्रोफेनोफोस 50% ईसी @ 400 मिली प्रति एकड़ या फिप्रोनिल 5% एस सी @ 400 मिली की दर से 15 दिन के अन्तराल से छिड़काव करें।
  • कीटनाशक को 15 दिनों के अंतराल में बदलकर उपयोग करें।

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Advantage of PSB in watermelon

फास्फोरस घोलक  जीवाणु का तरबूज की फसल में महत्व :-ये जीवाणु फास्फोरस के साथ साथ मैंगनीज, मैगनेशियम, आयरन, मॉलिब्डेनम, जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों को भी पौधे में उपलब्ध करवाने में सहायक होते है|

  • ये जीवाणु फास्फोरस के साथ साथ मैंगनीज, मैगनेशियम, आयरन, मॉलिब्डेनम, जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों को भी पौधे में उपलब्ध करवाने में सहायक होते है|
  • तेजी से जड़ों का विकास करने में सहायक होता है जिससे पानी और पोषक तत्व आसानी से पौधों को प्राप्त होते है |
  • पीएसबी कुछ खास जैविक अम्ल बनाते है जैसे मैलिक, सक्सेनिक, फ्यूमरिक, साइट्रिक, टार्टरिक एसिड और एसिटिक एसिड ये अम्ल फॉस्फोरस उपलब्धता बढ़ाते है|
  • रोगों और सूखा के प्रति प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाता है|
  • इसका उपयोग करने से  25 -30% फॉस्फेटिक उर्वरक की आवश्यकता कम होती ।

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